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Friday, 27 March 2015

महिला ने खोला 42 साल पुराना राज, राष्ट्रपति ने खुद जाकर दिया सम्मान


काहिरा।

एक मां अपने परिवार और बच्चों की परवरिश की खातिर कितनी मुसीबतों को खुशी-खुशी झेल सकती है इसका अंदाजा लगाना शायद मुश्किल ही नहीं नाममुकिन है। इसका ताजा उदाहरण है मिश्र की रहने वाली 64 वर्षीय शिशा अबू दूह। यह एक ऎसी महिला है जिसने अपना 42 साल पुराना राज खोला तो पूरे मिश्र समेत इसके बारे में जानने वाला हर शख्स आश्चर्य में पड़ गया।






42 साल तक रही पुरूष बनकर-
मिश्र एक ऎसा देश है जहां महिलाओं को सरेआम सामने आकर काम करने की आजादी नहीं है, लेकिन मजबूरी में शिशा ने ऎसा रास्ता निकाला जिससे लोगों को यह तक भनक नहीं लगी कि वो एक महिला है। यह महिला पूरे 42 साल तक पुरूष वेश में अल अकल्ताह शहर के चौराहे पर सरेआम बैठकर जूते पॉलिश का काम करती रही जिसका राज अब खुद ने ही खोला है।
पति की मौत ने किया मजबूर-
हालांकि शिशा का पुरूष बनकर जीने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन 1970 में उनके पति मौत हो गई थी। उनके एक बेटी भी थी जिसकी परवरिश करना जरूरी था, लेकिन घर में कमाने वाले की मौत होने और देश में महिला विरोधी कानून होने के चलते जीना मुश्किल हो चला था। शिशा ने जिंदगी से हार नहीं मानी और पुरूष बनकर आजीविका कमाने के लिए पुरूष वेश में जूते पॉलिश करने का काम अपना लिया।

पुरूषों के साथ पीनी पड़ी सिगरेट तक-
शिशा जब पुरूष वेश में चौराहे पर जूते पॉलिश का काम करने लगी है तो उसके साथ ही काम करने वाले अन्य लोग उसे पुरूष समझकर सिगरेट ऑफर करते थे। अपनी पहचान छुपाने की खातिर शिशा ने सिगरेट तक पीना शुरू कर दिया। रोज 1 या 2 डॉलर तक की कमाई करने वाली शिशा की हकीकत के बारे में सिर्फ उसके परिवार और पड़ौसी ही जानते थे। उसकी मजबूरी को देखते हुए पड़ौसियों ने भी कभी उसका यह राज किसी के सामने नहीं खोला और लोग उसे अबू दूह कहकर पुकारने लगे।

राष्ट्रपति ने दिया सम्मान-
महिला विरोधी महौल होने के बावजूद शिशा ने जो कदम उठाया वो सबसे अनोखा था। लेकिन अंत में जब शिशा ने अपना 42 साल पुराना राज खोला तो सबके सब चौंक गए। हालांकि कई लोगों ने उसे भला-बुरा भी कहा, लेकिन देश के राष्ट्रपति अदल फतेह अल-शिशि ने उसे एक साहसी मां कहते हुए अवॉर्ड देकर सम्मानित किया है।
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