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Monday, 27 March 2017

सैनिकों ने राइफलों में सुधार कर इंसास और ए.के. 47 को बनाया बेहतर, खुश हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, इस कहावत को भारतीय सेना ने एक बार फिर साबित किया है। सेना के सामने इस समय आतंकवाद और घुसपैठ का मुकाबला करना महत्वपूर्ण है जिसके लिए उसे बेहतरीन हथियारों की जरूरत है। मगर पिछले साल इंसास ( इंडियन स्माल आर्म्स सिस्टम)राइफलों की जगह आनेवाले लगभग पौने दो लाख हथियार खरीदने की निविदा रद्द होने के कारण सटीक मार करनेवाले हथियारों की जरूरत शिद्दत से सामने आई। बजाय हथियारों के आने का इंतजार करने के, सेना ने खुद ही पुरानी इंसास राइफलों में बदलाव कर उसकी मारक क्षमता बेहतरीन कर ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नवोन्मेष से काफी प्रभावित हुए और ऐसा करने वाले को ‘नवाचार प्रमाणपत्र’ भी दिया है।


सेना में इंसास राइफलों की जगह नई राइफल लाने में हो रही देरी को देखते हुए सैनिकों ने खुद ही वर्तमान हथियारों की कुल लंबाई और वजन को घटाने के नए तरीके इजाद किए। इन बदलावों से राइफल पकड़ने के दौरान होनेवाली थकाम के साथ ही उसकी सटीकता बढ़ी है। इंसास में हुए बदलाव के बाद सैनिक आसपास गोलीबारी कर सकते हैं। हालांकि सेना ने अब तक अन्वेषक और ब्योरे की जानकारी नहीं दी है। मगर सूत्रों का कहना है कि आतंक विरोधी अभियानों के लिए संशोधित इंसास एके-47 राइफल वर्तमान हथियारों की कुल लंबाई और वजन को कम करने के उद्देश्य से डिजाइन की गई है। इस बदलाव के अपने फायदे हैं। मसलन आतंक विरोधी अभियानों में इन राइफलों को इस्तेमाल किए जाने के दौरान उसका गुरुत्वाकर्षण का केंद्र सीध में आ जाता है। इसके चलते इंसास चलानेवाले सैनिकों को ज्यादा परिश्रम नहीं करना पड़ता है और उन्हें थकान कम होती है। साथ ही इससे राइफल की सटीकता भी बेहतर हो जाती है। सूत्रों ने कहा, ‘इंसास एके-47 राइफलों में बदलाव कॉर्नर शॉट क्षमता शामिल करने के लिए किए गए हैं। संशोधित राइफल गोलीबारी के समय ज्यादा स्थिर, चुस्त, आसानी से पकड़ी जाने योग्य और बेहतर सटीकता वाली हैं।’

कॉर्नर शॉट सैनिकों को खतरे में डाले बिना आसपास गोली मारने में सक्षम करता है। कॉर्नर शॉट वाली बंदूकों में आमतौर पर कैमरा और वीडियो मॉनिटर होता है ताकि शूटर आसपास देख सके। सेना ने पिछले साल इंसास की जगह लेने के लिए बहु क्षमता वाले 1.8 लाख हथियार खरीदने की चार साल पुरानी एक निविदा रद्द कर दी थी। इंसास राइफल 1990 के दशक में सेना के हथियारों में शामिल की गई थी।

कब तक करते इंतजार: सेना ने अब तक अन्वेषक और ब्योरे की जानकारी नहीं दी है, सूत्रों ने कहा कि आतंक विरोधी अभियानों के लिए संशोधित इंसास..एके-47 राइफल वर्तमान हथियारों की कुल लंबाई और वजन को कम करने के उद्देश्य से डिजाइन किए गए हैं ताकि आतंक विरोधी अभियानों में इस्तेमाल किए जाने के दौरान गुरुत्वाकर्षण का केंद्र सीध में लाकर सैनिकों की थकावट कम की जा सके और हथियारों की सटीकता बेहतर की जा सके।
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