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Friday, 24 March 2017

महज़ एक रूपये में वडोदरा के लोगों को किराये पर मिल रहे हैं आरथोपैडिक उपकरण

फाल्गुनी दोशी गुजरात के वडोदरा में रहती हैं। इन्होंने टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग में होमसांइस की है। मुंबई की रहने वाली फाल्गुनी जी का विवाह 27 वर्ष की उम्र में एक व्यवसायिक परिवार मेंहुआ। फाल्गुनी जी के मन में हमेशा से ही समाज के लिए कुछ करने की इच्छा तो थी पर शादी के बाद उन्हें अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इतना समय नहीं मिल पाता था कि वह अपनी इस इच्छा को पूरा कर सकें। उनका समाज के लिए कुछ करने का सपना तब ही पूरा हुआ जब उनके बच्चे बड़े हुए और उन्हें अपने लिए कुछ समय मिल सका।


उनके मन में समाज को लेकर कुछ करने के हौसले ने उन्हें आज ऐसे मुकाम पर पहुँचाया है जहां उन्होंने अपने सपने को न सिर्फ पूरा किया बल्कि समाज के लिए खुशी का कारण भी बनीं।उनकी यह कुछ करने की कहानी तब शुरू हुई जब आज से 16 वर्ष पहले वह एक बार अपनी सहेली के घर वडोदरा में गई। अपनी सहेली से कुछ देर बात करने के बाद फाल्गुनी जी ने कमरे के एक कोने में व्हीलचेयर, वाकर और कुछ छड़ी पड़ी हुई देखी। उन पर धूलकी बहुत मोटी परत चढ़ी हुई थी। उन पर चढ़ी हुई धूल से यह पता लग रहा था कि यह सब वस्तुएं उनकी स्वर्गीय दादी द्वारा इस्तेमाल की जाती थी लेकिन उनके गुज़र जाने के बाद ये सब वस्तुएं ऐसी ही पड़ी हुई हैं। 

फाल्गुनी जी ने बताया कि उनकी सहेली को यह नहीं पता था कि अब इन सब वस्तुओं का क्या किया जाये। तब फाल्गुनी जी ने उन्हें सुझाव दिया कि क्यों न इन वस्तुओं को किसी ज़रूरतमंद को दे दिया जाये। तब फाल्गुनी जी और उनकी सहेली ने अपनी जान पहचान वालों को बताया कि यदि किसी ज़रूरतमंद को व्हीलचेयर जैसे आॅरथोपैडिक उपकरणों की ज़रूरत हो तो वह यहां से ले सकता है।पहले तो उन्होंने यह उपकरण फ्री में देना शुरू किया। लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने यह महसूस किया कि उनके पास उपकरण कम हैं और ज़रूरतमंद ज्यादा हैं तब उन्होंने कुछ और ऐसे उपकरण खरीदने का फैसला किया। जिससे लोगों को मदद मिल सके। 

परंतु कुछ ही महीनों बाद उन्होंने यह महसूस किया कि लोगों को फ्री में मिलने वाली चीज़ों का वह ठीक से इस्तेमाल नहीं करते और किराये पर दी गई चीज़ें जब वापस आती तो वह अच्छी स्थिति में नहीं होती थी। तब उन्होंने यह तय किया कि किराये पर फ्री में उपकरण दिये जाने से अच्छा है कि हम उन लोगों से किराये के रूप में कुछ रूपये लें जिससे वह भी किराये पर लिये गये उपकरणों को संभाल कर इस्तेमाल करेंगे और उनके द्वारा दिये गए किराये के भुगतान से हम भी उपकरणों में हुई टूट फूट तथा नए उपकरणों को खरीदने में लगा पायेंगे। तब फाल्गुनी और उनकी सहेली ने लोगों से उपकरणों को किराये पर देने के बदले 1 रूपया एक दिन का लेना शुरू कर दिया। 


फिर उन्होंने अपने इस काम का स्तर बढ़ाने के लिए आॅरथोपैडिक अस्पताल के बाहर अपनी इस सेवा के विज्ञापन को लगवाया ताकि लोग उनके काम के बारे में लोगों को पता चल सके। उन्होंने बताया कि उनकी सहेली की कुछ निजी समस्याएं होने के कारण वह आगे यह सेवा जारी रखने में असमर्थ थी। तब फाल्गुनी जी ने अकेले ही इस सेवा को जारी रखने का फैसला किया और सारे उपकरण अपनी सहेली के घर से अपने बंगले में रखवा लिये।फाल्गुनी जी ने बताया कि आज उनके पास दर्जनों ऐसे उपकरण हैं जैसे टाॅयलेट चेयर से लेकर छड़ी, वाॅकर, व्हीलचेयर आदि। 

यह सब उपकरण 100 से ज्यादा संख्या में उनके पास उपलब्ध हैं जिन्हें वह नियमित रूपसे जरूरतमंद लोगों को इस्तेमाल करने के लिए देती हैं। फाल्गुनी जी ने बताया कि इस काम से उन्हें बहुत संतुष्टि मिलती है। फाल्गुनी जी ने बताया कि एक बार जब उनके भाई ने उनकी बीमार मां के लिए किराये पर अस्पताल में बेड लिया। तब तकरीबन साल से डेढ़ साल तक उस बेड को इस्तेमाल किया और उसके बाद वे गुज़र गई।

उनका भाई उनकी इस सेवा से बहुत खुश हुआ और फाल्गुनी को दान के रूप में 25,000 रूपये दिये जिससे वह ये उपकरण खरीदने में निवेश कर सकती हैं। यह काम वह किसीलाभ के लिए नहीं करती बल्कि यह उनके अनुसार यह केवल लोगों के फायदे के लिए है। उन्होंने बतायाकि इन उपकरणों का औसतन जीवनकाल 2 वर्ष है और उसके बाद वह नए उपकरणों का निवेश करती रहती हैं |
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