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Friday, 24 March 2017

खुद थके तो बनाई पैरों से पन्ने पलटने वाली मशीन

नवप्रवर्तन की परिभाषा ही रचनात्मकता के साथ कुछ अलग कर गुज़रने का जुनून है। असम के रहने वाले स्वपनिल तालुकदार ने एक व्हीलचेयर बना कर अलग ढंगसे विकलांग लोगों की मदद की है।गुवाहाटी, असम के युवा और भावुक प्रवर्तक स्वपनिल तालुकदार नेशारीरिक रूप से अक्षम लोगों केलिए एक ऐसी मशीन विकसित की है जो किताबों और अखबारों के पन्नों को पलट सकती है। स्वपनिलने दिव्यांगों के लिए किताब के पन्ने पलटने वाली मशीन बनाई है, जिसे लेकर उनका चयन स्काॅलर इनरेज़ीडेंस प्रोग्राम के लिये किया गयाव उन्हें एक हफ्ते तक राष्ट्रपति भवन में रहने का मौका भी मिला।

19 वर्षीय बी.टेक फस्र्ट इय रके स्वपनिल तालुकदार बताते हैं कि कई बार स्कूल कोचिंग से पढ़कर घर लौटते तो इतना थक जाते कि पढ़ाई के दौरान उनका मन किताब के पन्ने पलटने का भी नहीं करता।एक दिन उनके दिमाग में सवाल आया कि जिनके हाथ नहीं होते वे पेज कैसे पलटते होंगे? विज्ञान में तरह तरह के प्रयोग करने के शौकीन स्वपनिल नेतय किया कि वे ऐसे लोगों की मदद के लिए एक मशीन बनाएंगे जिससे पेज पलटने के लिए हाथों की ज़रूरत ही पड़े और वह पैरों सेचल सके।



उन्होंने 2014 में ऐसी मशीन तैयार की। उनके इस आविष्कार के लिए उन्हें उसी वर्ष नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन कीइग्नाइट प्रतियोगिता में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया। फिलहाल इनोवेशन फाउंडेशन मैनुअली काम करने वाली इस मशीन को आॅटोमेटिक बनाकर बेहतर करने के प्रयास कर रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्वपनिल बड़े होकर प्रोफेसर बनना चाहते हैं। वेडांस और ड्राॅइंग के भी शौकीन है।

स्वपनिल की माँ निर्मलीता लुक दार ने बताया कि वह नहीं जानती थीं कि उनका बेटा इतनी आगे तक जायेगा और इतना अच्छा काम करेगा। उनकी माँ को उन परगर्व है। उनकी माँ ने कहा कि वेस भी माता-पिता से यह अनुरोध करना चाहती हैं कि वे अपने बच्चों को हर एक अच्छे काम में उनका सहयोग दें। माता-पिता को बच्चों का पूरा सहयोग देना चाहिए और उनके काम के प्रति जुनून को बढ़ावा देना चाहिए, फिर चाहे वह काम किसी क्षेत्र से संबंधित हो जैसे खेल,संगीत या नृत्य।
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