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Wednesday, 18 February 2015

एक चाय वाला, जिसने लिखी हैं 24 से ज्यादा किताबें (Personal Creativity)

चाय बेचते-बेचते एक इंसान कब प्रधानमंत्री बन जाए, यह तो आपने देख ही लिया है। अब हम आपको एक और ऐसे चाय वाले के बारे में बताने जा रहे हैं, जो चाय पिलाने के साथ लेखन भी करते हैं। महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में जन्मे लक्ष्मण राव दिल्ली के आईटीओ की लाल बत्ती से चंद कदमों की दूरी पर बने हिंदी भवन के सामने चाय बेचते हैं। वह अपने हाथों से बनी चाय के साथ अपनी लिखी पुस्तकों की बिक्री भी करते हैं।
लक्ष्मण राव (फाइल फोटो)

62 साल के लक्ष्मण राव अभी तक 24 किताबें लिख चुके हैं, जिनमें 12 किताबें छप चुकी हैं और जून 2015 तक पांच और नई किताबें भी प्रकाशित करने वाले हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से सम्मानित भी हो चुके हैं। चाय बनाते-बनाते करीब 40 साल गुजार चुके लक्ष्मण राव की किताबें अब बुक फेयर में भी मिलने लगी हैं। हॉल नंबर 12 में एक छोटी सी स्टॉल पर उनकी किताबें मिल रही हैं।
लक्ष्मण राव से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपनी किताबें किसी बड़े प्रकाशन के जरिए नहीं, बल्कि खुद अपने नाम से प्रकाशित करते हैं। लक्ष्मण राव आईटीओ पर पटरी पर लगी चाय की दुकान के किनारें इन पुस्तकों को सेल करते हैं। वह अपनी लिखी किताबों की मदद से करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमा भी लेते हैं।

कैसे जागी लिखने की कला?
सवाल पर जवाब मिला कि जब वह अपने गांव में रहते थे, तब गांव के एक छोटे से लड़के ने नदी में नहाने की इच्छा जताई और वह नदी में कूद गया। लेकिन वह वापस लौट नहीं पाया। उसी लड़के पर आधारित घटना ने उन्हें लिखने की प्रेरणा दी। रामदास जोकि उस लड़के का नाम था, वह पुस्तक उन्होंने सबसे पहले लिखी। वह रामदास नाम का एक नाटक भी लिख चुके हैं। इस किताब के लिखने से उनका मनोबल बढ़ा और फिर लिखना शुरू किया। वह मशहूर लेखक गुलशन नंदा को अपना गुरू मानते हैं। हालांकि, उनकी कभी गुलशन नंदा से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उनकी किताबों पर आधारित बनी फिल्मों को देखकर वह लेखक बनने के लिए प्रेरित हुए।

कहां से करते हैं रिसर्च?
सवाल पर लक्ष्मण राव ने जवाब दिया कि वह रोजाना पांच अखबारों को पढ़ते हैं।

इसके अलावा दरियागंज में संडे मार्केट से किताबें खरीदते हैं। कुछ एक किताबें उन्होंने सरकारी कार्यालयों के जरिए मिली जानकारी पर आधारित भी लिखी है। उन्होंने बताया कि एक किताब उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल पर आधारित लिखी है। वह इस किताब को लिखने से पहले इंदिरा गांधी से मिले थे और उनके जीवन पर किताब लिखने की इच्छा जाहिर की। लेकिन इंदिरा गांधी ने जीवन पर लिखने की बजाय अपने कार्यकाल पर लिखने की अनुमति दी। उनकी यह पुस्तक 1984 में प्रकाशित हुई।

राव ने बताया कि वह पटरी पर अपनी पहली पुस्तक के प्रकाशित करने के दौरान से बेच रहे हैं, लेकिन 2011 से उन्होंने बुक फेयर में भी स्टॉल लगाकर बेचनी शुरू की। अब उनकी पुस्तकें ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध हैं। न्यूजहंट नाम की एक वेबसाइट उनकी किताबों के लिए 80 हजार रुपये भी दे चुकी है। राव ने अपने परिवार की जानकारी देते हुए बताया कि उनके घर में दो बेटे और उनकी पत्नी है। वह विवेक विहार में एक किराये के मकान में रहते हैं।
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