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Tuesday, 20 January 2015

देसी जुगाड़ से 2000 में बना ली वाशिंग मशीन, जानें कैसे करती है कामदेसी जुगाड़ से 2000 में बना ली वाशिंग मशीन, जानें कैसे करती है काम

रायपुर। 'वॉशिंग मशीन महंगी होती है, उसमें ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल होता है। डिटर्जेंट से प्रदूषण फैलता है। इसलिए मैंने इस मशीन को बनाया है।' अपने आविष्कार की वजह कुछ ऐसे ही साफ करते हैं कमल अग्रवाल।
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अपने स्वदेशी वाशिंग मशीन के साथ कमल अग्रवाल
शैलेंद्र नगर निवासी कमल अग्रवाल ने वॉशिंग मशीन का एक ऐसा विकल्प तैयार किया है जो ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ कम कीमत में वॉशिंग मशीन की जरूरत को पूरा करती है। इस मशीन को इन्होंने स्वदेशी वॉशिंग मशीन नाम दिया है।
 
ऐसे करती है काम
यह मशीन वाटर और एयर प्रेशर फॉर्मूले पर काम करती है। कमल अग्रवाल ने बताया कि एक मोटे प्लास्टिक पाइप में लंबा कट उन्होंने लगाया है। इस कटे पाइप को नीचे की तरफ करके उन्होंने प्लास्टिक के बॉक्स में फिट किया है। इस पाइप को एयर ब्लोअर से जोड़ा दिया गया है। जैसे ही ब्लोअर ऑन होता है तेज हवा बॉक्स में आती है। पानी भरा होने पर हवा की वजह से पानी उछलने लगता है और इसके दबाव से कपड़े धुलते हैं।
 
वाटर फिल्टर भी बनाया
क्या आप एक फीट लंबी प्लास्टिक पाइप, कोयले के चूरे और बाल्टी से मिनरल वाटर देने वाला वाटर फिल्टर बना सकते हैं? कमल अग्रवाल ने महज तीन सौ रुपए में ऐसा ही वाटर फिल्टर बनाया है।
अपने वाटर फिल्टर के साथ कमल अग्रवाल
अपने वाटर फिल्टर के साथ कमल अग्रवाल
वाशिंग मशीन का डेमो देते कमल अग्रवाल
वाशिंग मशीन का डेमो देते कमल अग्रवाल
कमल अग्रवाल का वाटर फिल्टर
कम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती है
कम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती हैकम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती है
कम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती हैकम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती है
कम लागत से तैयार यह वाशिंग मशीन किसी भी महंगी मशीन जैसा ही रिजल्ट देती है
कमल अग्रवाल ने नारियल के जूट से ईको-फ्रेंडली बास्केट भी बनाए हैं।
कमल अग्रवाल ने नारियल के जूट से ईको-फ्रेंडली बास्केट भी बनाए हैं।
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