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Thursday, 23 March 2017

भारत के रचनात्मक, कल्पनात्मक और कुछ नया करने को आतुर बच्चे ही राष्ट्र की बेहद कीमती संपत्ति है

एक राष्ट्र की सबसे कीमती संपत्ति राष्ट्र के रचनाशील, कल्पनाशील और कुछ नया करने को आतुर बच्चे हैं। उनकी अंतरआत्मा की संवेदनशीलता, सृजनशीलता और सहयोग ने उन्हें भारत के अच्छे नागरिक ही नहीं बल्कि देश के अच्छे कर्णधार भी बनाया है। नेशनल इनोवेशन फाउण्डेशन ने हर साल की तरह 15 अक्टूबर 2015 को ही Ignite प्रतियोगिता के पुरस्कारों की घोषणा की क्योंकि 15 अक्टूबर को स्व. डाॅ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्मदिवस है और नेशनल इनोवेशन फाउण्डेशन द्वारा इस दिन को बच्चों के बीच रचनात्मकता और मौलिकता को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है। स्व. डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी के जन्मदिवस को एन. आई. एफ. द्वारा अभिनव दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 27 जिले और 18 राज्यों में से
40  छात्रों द्वारा दिए गए 31 विचारों को सम्मानित किया गया कुल मिलाकर देश के लिए सभी विचारों को सम्मानित किया गया कुल मिलाकर देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के 425 जिलों से 28,1106 छात्रों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था और वह प्रस्तुति पुरस्कार वितरण सामारोह 30 नवंबर को आयोजित किया गया। जिसमें माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा अहमदाबाद में पुरस्कार दिए गए।

बच्चों के रचनात्मक विचार ही हमारे देश की विकास यात्रा को एक वैज्ञानिक गति प्रदान कर सकते हैं। जैसे जम्मू कश्मीर के मोहम्मद तवसीफ जो पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाये क्योंकि उनकी पिछले वर्ष 15 सर्जरियां हुई थी। इतने दर्द से गुजरने के बाद भी लोगों के जीवन को बदलने अर्थात कुछ नया करने की सोच के आगे उनका शारीरिक दर्द भी रूकावट नहीं बन सका। तब उन्होंने एक ऐसा कुकर विकसित करने का विचारा आया जो चावल, दाल आदि की अशुद्धियों का पता लग सकता है और उन अशुद्धियों को नष्ट भी कर सकता है।

Pebble indicating system for cooking vessel

16 वर्षीय मोहम्मद तवसीफ ठोकर राजकीय उच्च विद्यालय, कुलगम, जम्मू-कश्मीर के 10वीं कक्षा के छात्र हैं। सन् 2011 में एक दुर्घटना में उनकी टांग बुरी तरह से जख्मी हो गई थी, जिस कारण उन्हें अब तक 15 सर्जरियों से गुज़रना पड़ा है। यहां तक कि इस कारण वे नियमित रूप से स्कूल भी नहीं जा सके और इस वर्ष इन्हें अपनी अंतिम सर्जरी के लिए शैक्षिणक सत्र छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्हें स्कूल जाना बहुत अच्छा लगता है लेकिन जब सर्जरी के कारण वे स्कूल नहीं जा पाते थे तो उनके मित्र घर आकर उनका हौंसला बढ़ाते थे। तवसीफ को क्रिकेट, चेस और कैरम खेलना बहुत अच्छा लगता है और वह बड़े होकर सोफ्टवेयर इन्जीनीयर बनना चाहते हैं। उनके पिता जी खेती करते हैं व माता जी गृहिणी हैं। उनके दो भाई हैं, एक उनसे बड़ा
और एक उनसे छोटा है।

कई बार दाल, चावल या अन्य कुछ पकाते समय बहुत बार बीनने और धोने के बावजूद भी कुछ अशुद्धियां या कंकड़ रह जाते हैं। जो खाते समय दांत के नीचे आने से पता लगता है कि कंकड़ है। इस समस्या का समाधान करने के लिए तवसीफ ने एक विचार सुझाया है कि यदि कूकर में सैंसर लगा दिया जाये जो कुकर गर्म होते ही अशुद्धियों के बारे में संकेत दे सके और उसे नष्ट कर सके। यह विचार खाने में आने वाली अशुद्धियों को दूर कर सकता है और यह हमारे स्वास्थय के लिए बहुत लाभदायक भी साबित हो सकता है। तवसीफ ने बताया कि यह कुकर घर से दूर रहने वाले छात्रों के लिए अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो सकता है जो स्वयं अपना खाना बनाते हैं और जिनके पास समय का अभाव है।

Gas Lighter with Gas Leak Alarm

बिहार राज्य के पटना जिले के निलेश राय डी.ए.वी. स्कूल में कक्षा 9वीं में पढ़ते हैं। निलेश जी बताते हैं कि वे एक गरीब परिवार से संबंध रखते हैं लेकिन वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देते हैं। वे स्व. डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी से बहुत प्रेरित हैं। वे बताते हैं कि पहले वे पढ़ाई में ज्यादा अच्छे नहीं थें।
लेकिन एक हादसे ने उन्हें पूरी तरह बदल कर रख दिया। वे बताते हैं कि एक बार वह और उनके दोस्त चुपके से स्कूल के समय फिल्म देखने गए थे। लेकिन बाद में जब उनके पिता को इसके बारे में पता लगा तो उन्होंने निलेश को बहुत डांटा। उस दिन के बाद, निलेश ने यह निर्णय लिया कि अब के बाद से वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केन्द्रित करेंगे और फिज़ूल में अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि आज उनके माता-पिता को उन पर गर्व है कि उन्होंने यह आवार्ड जीता है।

गैस लीकेज की समस्या बहुत बड़ी है, कई बार गैस लीकेज के कारण बहुत बड़ी-बड़ी दुर्घटनायें हो जाती हैं। ऐसे ही एक बार निलेश के पड़ोसी के घर में कुकिंग गैस लीक होने के कारण आग लग गई थी और उनका बहुत नुकसान हुआ था। तब निलेश को विचार आया कि कितना अच्छा हो यदि गैस लीकेज होने पर चूल्हा चलाने से पहले ही हमें कुछ ऐसे संकेत हो जाये कि गैस लीक हो रही है। तब उन्होंने सोचा कि जिस लाइटर को हम गैस चलाने के लिए प्रयोग करते हैं यदि वो ही हमें गैस लीकेज के बारे में संकेत दे तो बहुत अच्छा होगा और गैस लीकेज के कारण दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा है। उनका यह विचार है कि यदि गैस लाइटर में सैंसर और साइरन लगा दिया जाये तो गैस लीकेज होने पर गैस स्टोव चलाने से पहले ही साइरन संकेत दे देगा और
लाइटर चलेगा ही नहीं। निलेश जी ने बताया कि वे एक मकैनिकल इंजिनीयर बनना चाहते हैं और ऐसी ही उपयोगी वस्तुएँ बनाना चाहते हैं। उनके इस  विचार के लिए राष्ट्रपति महोदय द्वारा निलेश राय को सम्मानित करने पर उनके माता-पिता को उनपर बहुत गर्व है।

Seed Container that indicates growth of Germs

दीप्ती मंजरी दकुआ ठींकरीवसम ळपतसेए भ्पही ैबीववसए छंलंहतंीए व्कपेीं में 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। दीप्ती के पिता शारीरिक रूप से विकलांग हैं और गांव में एक छोटा-सा होटल चलाते हैं तथा उनकी माँ गृहिणी है। दिप्ती का एक बड़ा भाई है जो पढ़ाई करता है। दीप्ती का कहना है कि वह बड़ी होकर बैंकर बनना चाहती है जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सके। उन्होंने बताया कि वह खेल-कूद से ज्यादा अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती हैं और समाचार-पत्रों में नए आविष्कारों और मशीनों की जानकारी पूर्ण कटिंग करना उनकी आदत है।
दीप्ती ने बताया कि जब भी उनकी माँ अनाज को संग्रहीत करके रखती हैं तो सूक्ष्म जीव और कीड़े अनाज पर हमला करके अनाज को नष्ट कर देते थे और यह पता नहीं लग पाता था कि क्या संग्रहीत अनाज कीटों से प्रभावित है या नहीं। इस समस्या को सुलझाने के लिए दीप्ती ने सोचा कि क्यों न संग्रहित अनाज में कीटों के विकास की दर जांचने के तरीके को निर्धारित किया जाये। तब दिप्ती ने तापमान बढ़ने पर कीटों की गतिविधियों का अध्ययन करना शुरू किया। उन्हें विचार आया कि मैटाबोलिज्म से हीट उत्पन्न होती है। इससे उन्हें ऐसा सीड कंटेनर बनाने का विचार आया जो कंटेनर के तापमान को जांच कर उसमें भरे अनाज में कीटाणुओं और कीटों के विकास की दर का संकेत मिल सके।

Printed Paper Reclaiming Machine

अरविन्द गोपालकृष्णन, चेन्नई के श्रीमति नर्बदा देवी जे. अग्रवाल विवेकानन्द विद्यालय में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। अरविन्द एक आॅटोमोबाइल इन्जीनीयर बनना चाहते हैं और वे अब तक कई साइंस प्रोजैक्ट, पेपर प्रस्तुतिकरण और डिबेट कांटेस्ट भी जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनकी स्कूल मैगजीन में उनके कई लेख भी आते हैं। अरविन्द जी को फोटोग्राफी कवितायें लिखने और नई जगहों पर जाने का बहुत शौक है। वे कहते हैं कि उनकी माँ जो अध्यापक है उनके लिए आदर्श हैं, मां के अलावा उनके परिवार में उनके पिता जो बीमा एजेंट हैं, उनके दादा-दादी व उनका बड़ा भाई है जो इन्जीनीयरिंग कर रहा है।

12वीं के छात्र अरविन्द ने एक ऐसे प्रिंटर के बारे में सुझाया है जो प्रिंट हो चुके पेपर को साफ कर सकता है जिससे इस्तेमाल हो चुके पेपर को दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक बार वे स्कूल में कम्पयूटर लैब में प्रिंट आउट निकाल रहे थे तो प्रिंटिंग की हीटिंग क्वायल के ठीक से काम न करने के कारण प्रिंट निकालने पर प्लेन पेपर ही निकल कर आ रहा था। तब अरविन्द को विचार आया कि दफ्तरों में रोज़ाना कितने पेपर खराब होते होंगे यदि प्रिंटिड पेपर को प्लेन कर दिया जाये तो पेपर को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा संभव हो पाता है तो पेपर के लिए जो हज़ारों पेड़ काटे जाते हैं वे भी बच जायेंगे और इससे हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रह पायेगा।

A Solar thresher to end harvesting woes

अण्डमान-निकोबार महाद्वीप के कक्ष 12वीं के दिपांकर दास जो दिगलीपुर के सरकारी सीनियर सकैण्डरी स्कूल के छात्र हैं। उनका मनपसंदविषय शारीरिक शिक्षा है। जब वह पढ़ाई नहीं करते तो वह अपने माता-पिता की  में मदद करते हैं या उस समय को वह विज्ञान के विभिन्न प्रकार के माॅडल बनाने में लगाते हैं। वह बताते हैं कि जब वह रात को मशीन बना रहे होते हैं तो उनकी माँ सुबह 3 बजे उठती तो उन्हें माॅडल पर काम करते देख थोड़ी देर सो जाने के लिए कहती और उन्हें देर तक जागने के लिए डांटती थी। लेकिन आज वह बहुत खुश हैं कि उनकी सारी कड़ी मेहनत वसूल हो गई है। दिपांकर का कहना है कि वह मकैनिकल इंजिनीयर बनना चाहता है और कम दाम वाली मशीनें तैयार करना चाहता है।

अपने माता-पिता को हाथ से दाल की फसल की कटाई करते देख उन्हें अच्छा लगता था और न ही वे थ्रैशिंग मशीन खरीद सकते और न ह किराये पर बिजली ही जुटा सकते हैं। इन्हीं सब चीज़ों ने उन्हें सौर थ्रैशर बनाने के लिए प्रेरित किया ताकि वे दाल, चना जैसी फसलों की कटाई बिना बिजली और ईंधन का प्रयोग कर सकें। सन् 2013 में दिपांकर ने एक पैडी ड्रायर विकसित किया जिसे राज्य स्तर पर एक प्रदर्शनी के लिए चुना गया। उन्होंने बताया कि वे एक साल से सौर थ्रैशर के प्रोटोटाइप पर काम कर रहे थे। वे अपने परिवार के लिए बहुत सारे कृषि
उपकरण बनाना चाहते हैं, जिससे उनकी ज़िंदगी आसान हो सके। 18 वर्षीय दिपांकर रोज़ाना शाम 7 से 11 बजे तक पढते हैं और उसके बाद रात को अपने प्रोटोटाइप पर काम करते हैं।

Smart walking stick

नई दिल्ली के सिद्धांत खन्ना जो संस्कृति स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं में पढ़ते हैं जिन्हें पढ़ाई के अलावा पियानो बजाना, फोटोग्राफी करना, रोबोट बनाना और अन्य साइंस प्रोजैक्ट बनाना अच्छा लगता है। सिद्धांत के पिता
भारतीय राजस्व सेवा में अतिरिक्त आयुक्त हैं और उनकी माता जी एक रोगविज्ञानी है। उनकी एक छोटी
बहन है जो छठी कक्षा में पढ़ती है।

 सिद्धांत ने एक ऐसी छड़ी विकसित की है जिसकी अनेकों विशेषतायें हैं जैसे कदम गिनना, एमरजैंसी अलार्म, स्वचालित होने वाली टाॅर्च और यहां तक दवाइयां याद दिलाने वाला रिमाइंडर भी है। सिद्धांत को यह विचार तब आया जब उसके 76 वर्षीय नाना जी को बिना किसी सहारे के घर के आस-पास भी चलना कितना मुश्किल होता था। उन्होंने यह भी बताया कि वह अकसर बिमार भी रहते थे और उस समय में उन्हें हमेशा किसी न किसी की मदद की जरूरत होती थी।

Loom for Physically Challenged

पवित्रा और एलाकिया दो बहने हैं और वे तमिलनाडू राज्य के इरोड जिले में रहती हैं। पवित्रा ैत्ब् मैमोरियल मैट्रिकुलेशन स्कूल की 10वीं कक्षा में पढ़ती है और एलकिया भी उसी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ती है। पवित्रा के गणित और विज्ञान मनपसंद विषय हैं और वह नेत्र विशेषज्ञ बनना चाहती है जबकि उनकी बहन एलकिया बड़े होकर वैज्ञानिक बनना चाहती है। दोनो ही बहने डाॅ. अब्दुल कलाम जी से बहुत प्रेरित हैं।

पवित्रा ने बनाया कि वह सन् 2013 में IGNITE आवार्ड के दौरान डाॅ. अब्दुल कलाम से मिली थी। वह भरतनाट्यम में माहिर हैं और पढ़ाई के अलावा उन्हें नवप्रर्वतनों के बारे में सोचना अच्छा लगता है। उन्होंने देश भर में विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनियों मंे भाग लिया है और कई सम्मान भी जीते हैं। एलकिया चेस प्लेयर और डांसर है और उनका कहना है कि उनकी मां ही आविष्कारों को विकसित करने में उनका साहस बढ़ाती है। दोनों बहनें उनके जिले में विज्ञान और नवप्रर्वतन केन्द्र खोलकर ज्यादा से ज्यादा नवप्रर्वतकों का साहस बढ़ाकर पिता का सपना पूरा करना चाहती है। तमिलनाडु का इरोड जिला हथकरघे की बुनाई के लिए जाना जाता है। पवित्रा और एलकिया के पड़ोस में हथकरघे की बुनाई करने वाला रहता है जो पिछले 30 सालों से हथकरघे की बुनाई का काम करता था लेकिन टांग में दर्द बढ़ने के कारण वह पहले की भांति उतनी कुशलता से काम नहीं कर पा रहा था। इस वजह से दोनों बहनों के ज़हन मे एक नए प्रकार का हथकरघा डिजाइन करने का ख्याल आया।
तब दोनों बहनों न एक ऐसा हथकरघा तैयार किया जिसे शारीरिक रूप से विकलांग लोग आसानी से चला सकते हैं। इस चरखे में उन्होंने पैडल से चालित करने की जगह मोटर और गियर बाॅक्स लगाया है जिसे चरखी तंत्र से जोड़ा गया है।

अपने पड़ोसी की मदद करने के लिए दोनों बहनों ने वर्कशाॅप से जरूरत का समान इक्कठा किया और अपने इस विचार पर काम करना शुरू कर दिया। दोनों बहनों ने सफल होने तक बहुत सारी कठिनाइयों का समान किया। बड़ी बहन पवित्रा ने कहा कि उनका यह आविष्कार उन सभी शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

A Punching Machine with hole Reinforcement mechanism

तनमय तकाले श्री महलसाकांत विद्यालय के बारहवीं कक्षा के छात्र हैं और महाराष्ट्र में पुणे जिले के निवासी है। तनमय को फुटबाल खेलना, स्कैचिंग करना और किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। तनमय ने बताया कि वह हमेशा कुछ न कुछ नवप्रर्वतनशील वस्तुएं बनाना चाहते हैं जिससे लोगों की जिंदगी आसान हो सके। तनमय का कहना है कि हर एक को बड़े सपने देखने चाहिए और कड़ी मेहनत करनी चाहिए और मेहनत का फल हमेशा मिलता है जो रात भर जाग कर अपने अपने आविष्कारों पर काम करते हैं।

तनमय के पिता एक विनिर्माण कंपनी में काम करते हैं और उनकी माता जी एक बीमा एजेंट है और उनकी एक छोटी बहन है। तनमय ने बताया कि वे 10वीं कक्षा में थे तो उन्हें अपनी परीक्षा से पहले पढ़ाई के लिए बहुत सारे पेपरों को फाइल करना पड़ता था और बार-बार पेपर फाइल से निकालने और डालने के कारण पंच किये हुए पेपर छेद के आस-पास से फट जाते थे और उन्हें दोबारा फाइल में लगाना कठिन था। तब उन्हें विचार आया कि यदि पंच मशीन में पेपर को पंच करने के साथ-साथ छेद के ऊपर एक रिंग जैसा छल्ला लगाने वाली सुविधा हो जाये तो पेपर छेद के आगे से नहीं फटेंगे और पेपरों को बार-बार निकालना और डालना भी आसान हो जायेगा।

A Colour coded thermometer

एक पारंपरिक थर्मामीटर को चेक करना कई बार बच्चों, बूढ़ों और अनपढ़ लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए विभिन्न राज्यों के दो विद्यार्थियों ने एक जैसा ही सुझाव दिया है। जन्मेजय जो कि कर्नाटक के बैंगलोर शहर में रहते हैं और जसप्रीत कौर जो पंजाब के जलंधर जिले में रहती है। जन्मेजय 12वीं कक्षा में पढ़ते हैं और जसप्रीत कौर 10वीं कक्षा में पढ़ती है। उन दोनों ने एक ऐसे थर्मामीटर का विचार खोजा है जो तापमान को रंग के आधार पर बता सकता है, जैसे कि अधिक तापमान होने पर लाल रंग, कम तापमान होने
पर नीला रंग और सामान्य तापमान होने पर हरा रंग यह थर्मामीटर दर्शाता है।

जन्मेजय ने बताया कि यह थर्मामीटर केवल शरीर का तापमान ही नहीं बताता बल्कि विभिन्न रंगों द्वारा शरीर की स्थिति बताने के साथ-साथ सावधानियों की जानकारी भी दे सकता है तथा अपातकालीन स्थिति में ऐबुलैंस को भी बुला सकता है। उन्होंने बताया कि इस थर्मामीटर में एक स्पीकर भी लगा है जो नेत्रहीन या आंखो से न देख पाने वालों को तापमान आवाज़ संदेश के माध्यम से दे सकता है। यह थर्मामीटर सिर्फ मनुष्यों के लिए ही नहीं बल्कि डायरी और पोल्ट्री फार्म वाले पशुओं के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जसप्रीत ने बताया कि कुछ महीने पहले उनके पिता को टाॅयफायड हो गया था तब परंपरागत थर्मामीटर से तापमान चेक करते समया उन्हें समझने में बहुत मुश्किल हुई थी। तब उन्हें यह थर्मामीटर विकसित करने का विचार आया जिस थर्मामीटर में लाल रंग उच्च तापमान के लिए, नीला रंग कम तापमान के लिए और हरा रंग सामान्य तापमान के लिए होने पर तापमान बच्चों, बुढ़ों और अनपढ़ लोगों के लिए जांचना आसान हो जाएगा।
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