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Saturday, 25 March 2017

अपनी खेती अपना खाद, अपना बीज अपना स्वाद - प्रकाश सिंह रघुवंशी

प्रकाश सिंह रघुवंशी (49) ने किसानों के लिए बेहतर बीजों का विकास करने के लिए हमेशा कठोर परिश्रम किया है. उन्होंने गेहूँ, धान, सरसों और तुअर की उच्च उपज वाली किस्मों का विकास किया है. प्रकाश अपनी माँ, पत्नी, छ: बच्चों और भाई के साथ वाराणसी के टांडिया गाँव में एक संयुक्त परिवार में रहते हैं. उनके दो अन्य भाई भी हैं जो कि किसान हैं जबकि साथ रहने वाले भाई की स्वयं की बीज की कंपनी है जिसके द्वारा विकसित बीज बेचे जाते हैं.

रघुवंशी के पास साढ़े तीन एकड़ भूमि है जिस पर वह गेहूँ, धान और तुअर की खेती करते हैं. उसके परिवार के सदस्य विशेष रूप से उनका बड़ा पुत्र रणजीत, खेती कार्य में उनकी सहायता करता है. उनके सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

अनुसंधान के लिए प्रेरणा

कृषि में नई बातों के साथ स्वयं को अद्यतन रखने के लिए, रघुवंशी नियमित रूप से कृषि मेलों में भाग ले रहे हैं और वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों से मिल रहते हैं.

नई किस्मों का विकास करने की उनकी प्रेरणा - डॉ. महातिम सिंह, पूर्व प्राध्यापक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) और पूर्व उपकुलपति, जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT) से आई. डॉ. सिंह ने उन्हें बेहतर किस्मों का विकास करने के लिए प्रेरित किया जिनका उपयोग अन्य किसानों द्वारा अपना जीवन बेहतर करने के लिए किया जा सके.

नवप्रवर्तन

रघुवंशी ने कई बेहतर उच्च उपज वाली गेहूँ, धान, सरसों और तुअर की किस्मों का विकास किया है जो बड़ी महामारियों और बीमारियों के लिए प्रतिरोधी हैं और उनमें अच्छी गंध और स्वाद वाले बीज होते हैं. इन किस्मों को पौधों की विशिष्ट चारित्रिक विशेषताओं पर आधारित सरल चयन का उपयोग करके विकसित किया गया है.

गेहूँ की बेहतर किस्में

तीन गेहूँ की किस्में - कुदरत 5, कुदरत 9, कुदरत 17 का विकास कल्याण सोना और RR21 किस्मों से किया गया है. कुदरत 9, कुदरत 5, कुदरत 17 के पौधे की ऊँचाई क्रमश: 85-90 सेमी., 95-100 सेमी. और 90-95 सेमी है जबकि बालियों की लंबाई 9 सेमी, 6 सेमी और 10 सेमी; 1000 बीजों का वजन 70-72 ग्राम, 58-60 ग्राम, 60-62 ग्राम है; और प्रति एकड़ उपज 20-25 क्विंटल है, 15-20 क्विंटल और 22-27 क्विंटल क्रमश: है.

सामान्यत: गेहूँ की किस्मों को बालीधानों की उच्च संख्या, लंबी बालियों और प्रति बाली बीजों की अधिक संख्या, कठोर तना और उच्च प्रोटीन मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है.

धान की बेहतर किस्में

धान की तीन किस्में - कुदरत 1, कुदरत 2 और लाल बासमती का विकास HUVR-2-1 और पूसा बासमती किस्मों से किया गया है. कुदरत 1, कुदरत 2 और लाल बासमती किस्मों की स्थिति में परिपक्व होने के लिए दिनों की संख्या क्रमश:130-135 दिन, 115-120 दिन और 90-100 दिन है जबकि प्रत्येक की प्रति एकड़ उपज (क्रम में बताई गई) 25-30 क्विंटल, 20-22 क्विंटल और 15-17 क्विंटल है. धान की किस्मों में बालियों की उच्च संख्या और प्रति बाली बीजों की अधिक संख्या होती है.

तुअर की बेहतर किस्में

तीन तुअर की किस्में - कुदरत 3, चमत्कार, करिश्मा का विकास आशा और मालवीय 13 किस्मों से किया गया है. कुदरत 3 एक चिरस्थायी किस्म है जबकि अन्य दो वार्षिकी हैं. कुदरत 3, चमत्कार और करिश्मा की स्थिति में प्रति पौधा फलियों की संख्या क्रमश: 500-1000, 400-600 और 450-650 है जबकि उपज प्रति एकड़ 12-15 क्विंटल, 10-12 क्विंटल और 10-12 क्विंटल है. इन किस्मों में मोटे बीज, दृढ़ तने और प्रति पौधा फलियों की अधिक संख्या होती है.

सरसों की बेहतर किस्में

तीन सरसों की किस्में - कुदरत वंदना, कुदरत गीता, कुदरत सोनी का विकास सरल चयन का उपयोग करके उनके द्वारा किया गया है. किस्मों की औसत बीज उपज क्रमश: 1430.52 किग्रा /हेक्ट, 1405.24 किग्रा /हेक्ट और 742.23 किग्रा/हेक्ट; औसत तेल मात्रा 42.30 प्रतिशत, 39.00 प्रतिशत और 35.50 प्रतिशत के साथ है. कुदरत वंदना का विशेष गुण प्रति फली बीजों की अधिक संख्या और उच्च तेल मात्रा है जबकि कुदरत गीता और कुदरत सोनी के लिए उनकी विशेषता है गुच्छेदार फलियां और मोटे बीज. सरसों की किस्मों का आकलन एन.आर.सी.आर.एम्., भरतपुर में किया गया है.

प्रसार और प्रतिक्रिया

रघुवंशी एक नवप्रवर्तनकारी किसान हैं और उन्होंने उत्तर भारत में कई किसान मेलों और कृषि मेलों में भाग लिया है. उन्होंने उ.प्र. में वाराणसी, इलाहाबाद; मध्यप्रदेश में जबलपुर, नरसिंहपुर, खरगोन, इन्दौर, भोपाल; छत्तीसगढ़ में रायपुर, भिलाई, धमतरी; महाराष्ट्र में जलगाँव, यवतमाल, अमरावती और पुणे; तथा राजस्थान में कोटा, भरतपुर, डूँगरपुर, जयपुर और सीकर; एवं गुजरात में अहमदाबाद, गाँधीनगर, अमरेली, सबरकंथा; तथा बिहार, हरियाणा व पंजाब के कुछ भागों में अपने गेहूँ की किस्मों के बीच वितरित किए हैं जहाँ से रिपोर्ट और किसानों की प्रतिक्रियाएँ प्रशंसनीय रहीं हैं.

उनकी सरसों और तुअर की किस्मों के लिए यू.पी., राजस्थान, पंजाब, बिहार और हरियाणा से किसानों से प्रोत्साहनवर्धक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है. उनकी नई फसल की किस्मों को एक किसान मेले में और वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान से प्रशंसा प्राप्त हुई है जिन्होंने उनकी गेहूँ की किस्मों का परीक्षण किया.

वह चौथी प्रतिस्पर्धा के लिए तकनीकों का आकलन करने हेतु रा.न.प्र की सूचना अनुसंधान सलाहकार समिति (RAC) का भाग रहे हैं. रघुवंशी ने 2006 में श्रृष्टि-रा.न.प्र. द्वारा आयोजित पारंपरिक भोज उत्सव ‘सात्विक’ में भाग लिया जहाँ उन्होंने उनकी किस्मों के लिए अच्छा प्रतिसाद प्राप्त किया. उन्होंने 2007 में मूलभूत नवप्रवर्तनों और पारंपरिक ज्ञान के लिए रा.न.प्र. के चौथे राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में सांत्वना पुरस्कार जीता था. रा.न.प्र. ने उनकी गेहूँ की किस्मों - कुदरत 7, कुदरत 11 और तुअर की किस्म कुदरत 3 के पीपीवीएफआर अधिनियम 2002 के अंतर्गत आवेदन फाइल किया है.

उन्हें नर्सरी विकास, खेती और उनकी बेहतर किस्मों के लिए निर्माण माध्यमों को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म उपक्रम नवप्रर्वतन कोष (एमवीआईएफ) के तहत 1,90,000/- रु. की वित्तीय सहायता प्रदान की गई.

संपूर्ण कठोर कार्य जो वह विभिन्न फसलों की बेहतर किस्मों का विकास करने के लिए करते हैं वो एक एकल साधारण परिसर पर आधारित होते है. वह कामना करते हैं कि प्रत्येक किसान को फसलों की उच्च उपज वाली किस्मों के बेहतर गुणवत्ता बीजों पर पहुँच प्राप्त होना चाहिए ताकि यह किसान के साथ-साथ देश के लिए भी लाभदायक हो.
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