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Monday, 27 March 2017

एक ऐसा शख्स जो पेड़ों को बिना काटे अपनी जगह से हटा देता है

अगर हम पेड़ की बात करें तो सभी जानते होंगे की पेड़ों से ही इंसान की जीवन संभव है। बिना पेड़ों नहीं जी सकते और आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे शख्स के बारे में जो कि पेड़ों को बिना काटे उनकी जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं...
आज हम आपको बैंगलोर के रहने वाले एक शख्स के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने 5000 पेड़ों को बिना काटे उनकी जगह से हटा दिया। एक बार उन्हें जयामहल एरिया में स्टील फ्लाइओवर बनाने के लिए बीच में आने 112 पेड़ों को हटाने को कहा गया। अगर इन पुराने पेड़ों को काटा जाता तो बहुत ज्यादा नुकसान होता। लेकिन इस शख्स ने चमत्कार करके दिखा दिया। दुनिया आगे बढ़ने की राह पर चल रही है इसलिए भारत देश में भी तरह-तरह की इमारते बनती रहेंगी।


लेकिन इन सब के बीच देश की हरियाली खत्म नहीं होनी चाहिए। इस हरियाली को बचाने के लिए एक नया तरीका सामने आया है। 2009 में हैदराबाद-विजयवाड़ा हाइवे बनाने के लिए बहुत सारे पेड़ काटे गए। जिस पर बहुत से लोगों ने इस पर विवाद खड़ किया। हैदराबाद के रहने वाला रामचंद्रा अप्पारी ने इस सब को रोकने के लिए एक नया कदम उठाया। रामचंद्रा ने बताया कि उन्होंने अपनी इस परेशानी को अपने ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले मित्र को बताई जिसने उन्हें पेड़ को अपनी जगह से हटाने का नया उपाए बताया। जिसके बाद रामचंद्रा ने Green Morning Horticulture Service Private Limited नाम की एक संस्था खोली जो कि पेड़ को अपनी जगह से सुरक्षित हटाने का काम करती है।


रामचंद्रा 2000 साल पहले मिस्त्र में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक से ये काम पूरा करते हैं। हम सभी जानते हैं कि पेड़ इंसान के जीवन में बहुत ज्यादा अहम रोल निभाता है। पेड़ को क्रेन द्वारा उठाकर फिर जूट से कवर करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है। पेड़ को ट्रॉली पर रखकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है। हैदराबाद में मैट्रो रेल के निर्माण में 800 पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया गया। इस दौरान पेड़ में कीट नाशक दवाई छिड़की जाती है। 5 साल पुराने एक पेड़ को अपनी जगह से हटाकर नई जगह पर रखा गया जिसके बाद आज वह बिल्कुल हरा-भरा है। अगर आपको भी इस तरह के काम की जरुरत पड़े तो आप मिस्टर अप्पारी से ramachandra.appari@gmail.comपर बात कर सकते हैं।


वनों के क्षेत्रों में पेडों को जलाना या काटना ऐसा करने के लिए कई कारण हैं। पेडों और उनसे व्युत्पन्न चारकोल को एक वस्तु के रूप में बेचा जा सकता है और मनुष्य के द्वारा उपयोग में लिया जा सकता है जबकि साफ़ की गयी भूमि को चरागाह (pasture) या मानव आवास के रूप में काम में लिया जा सकता है। पेडों को इस प्रकार से काटने और उन्हें पुनः न लगाने के परिणाम स्वरुप आवास (habitat) को क्षति पहुंची है, जैव विविधता (biodiversity) को नुकसान पहुंचा है और वातावरण में शुष्कता (aridity) बढ़ गयी है। साथ ही अक्सर जिन क्षेत्रों से पेडों को हटा दिया जाता है वे बंजर भूमि में बदल जाते हैं।
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