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Saturday, 25 March 2017

भगवान सिंह डांगी ने विकसित की ट्रैक्टर से चलने वाली रीपर विंड्रॉअर

खेत में सबसे ज्यादा समस्या कटाई में आती है। बाकी सभी कामों के लिए मशीन हैं पर कटाई हार्वेस्टर बड़े किसान ही खरीद सकते हैं। यही वह अभिलाषा थी जिसने भगवान सिंह डांगी, जो मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव के किसान है, उनको यह मशीन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी रीपर विंड्रॉअर एक ऐसी मशीन है जो फसल को काटती है और बीच में विंड्रॉ (काटी गई सूखी घास-छोटे अनाज की फसल की एक पंक्ति) करती है। भगवान सिंह का जन्म एक किसान परिवार में हुआ। वह बचपन से ही मशीनों में रूचि रखते थे। जब उनके घर रिपेयरमेन मशीनों को ठीक करने के लिए आते थे तो वह उन्हें देखते हुए घंटों बैठे रहते थे। 


वह बताते हैं कि जैसे-जैसे वह बड़े हुए, वह घर के बाहर पड़ी कोई घड़ी उठाते और इसे खोलकर पता लगाते थे कि अंदर क्या था। जबकि उनके भाई स्नातक हैं, फिर भी भगवान सिंह कृषि में रुचि रखते थे। 1973 में, उन्होंने अपने परिवार की खेती में सहायता करने के लिए कक्षा 12 के बाद विद्यालय छोड़ दिया। उन्होंने मशीनों के प्रति अपने प्रेम पर भी ध्यान दिया और कृषि साधनों का निर्माण और उनकी मरम्मत करके ठोका-पीटी करना शुरु किया। 

प्रथम सफलता - ट्रैक्टरों के लिए आगे की ओर चढ़ने वाली ब्लेड 

उनके गाँव में खेती करना चुनौतीपूर्ण था। पहली परेशानी जिसका उन्होंने सामना किया वह गड्ढों वाली असमतल भूमि थी। इसलिए उन्होंने भूमि समतल करने और बंडिंग करने के लिए एक फ्रंट-माउंट वाली ब्लेड का विकास किया। उन्होंने इस ब्लेड को 1982 में बनाया था किंतु वह आज भी इसे अपने खेत में उपयोग करते हैं। अन्य लोगों ने उनकी नकल की है किंतु वह खुश हैं कि अब उनके क्षेत्र में कई लोग इस खेतीहर उपकरण को ट्रैक्टरों में लगाने में निपुण हैं। उन्होंने बताया कि उनका अगला नवप्रर्वतन 40 प्रतिशत तक बोरवेलों के निरावेशन को बढ़ाने के लिए 1995 में बनाया गया एक रबर उपकरण था।उन्होंने अपने रीपर विंड्रॉअर को विकसित करने के पूर्व छोटे गैजेट्स और खेती उपकरणों को सुधारना जारी रखा।

नवप्रवर्तन की उत्पत्ति :

उनके गाँव में सोयाबीन प्रमुख फसल है। कटाई के शीर्ष समय के दौरान श्रम की कमी एक बड़ी समस्या है। इसी समाधान को ढूँढने का प्रयास करते हुए, भगवान सिंह ने उन मशीनों के लिए बाजार खोजा जो तेजी से और न्यूनतम अनाज हानि के साथ कटाई करती हों। दो मुख्य कार्य बुवाई और विंड्रॉइंग निष्पादित करने के लिए एक मशीन की आवश्यकता थी। बुवाई में फसलों का व्यवस्थित रूप से काटना सम्मिलित होता है जबकि विंड्रॉइंग में कटे हुए डंठलों को आसानी से ढेर बनाने के लिए पंक्ति में जमाना और कटाई के पश्चात की प्रक्रियाएँ आती हैं। कुछ मशीनें जो उनके संपर्क में आईं वे स्वतः घूमने वाले रीपर्स थीं, जिनमें कटी हुई फसल को मशीन के एक ओर रखते हैं, जिससे उच्च चूर होने वाली हानियाँ होती हैं। इसके अतिरिक्त, डंठलों के अधिक भाग खेतों में छोड़ दिए जाते थे जिसमें अगली बार कार्य करने के पूर्व हाथ से सफाई करने की आवश्यकता होती थी। यह व्यवस्था बार-बार फेरों वाले छोटे खेतों के लिए व्यवहारिक नहीं थी क्योंकि यह खड़ी फसल को क्षतिग्रस्त करती थी। पकी हुई फसल को पंक्ति में लगाया जाता था, जिसे बारी आने पर ही छोड़ा जाता था। इससे इंजन पर अनावश्यक भार पड़ा और इस प्रकार ईंधन उपभोग में वृद्धि हुई। अपने छोटे आकार के खेत के लिए उपयुक्त किसी मशीन को ढूँढने में अक्षम होने पर, फिर उन्होंने स्वयं की मशीन बनाने के बारे में सोचा। उन्होंने फसलों को काटने और छोड़ने के लिए यांत्रिकी के साथ एक फ्रंट माउंट वाली षटभुजी घुमावदार रील के साथ एक हल्के, दक्ष वाहन को बनाने के बारे में सोचा। उनका प्रथम प्रोटोटाइप 2001 में तैयार हुआ।


इससे प्रेरित होकर, उन्होंने स्वयं की वर्कशॉप प्रारंभ करने का निर्णय किया जहाँ वह अपनी कल्पना और रचनात्मकता को आकृति दे सकते थे। उन्होंने अपनी संपत्ति के विरुद्ध एक ऋण लिया और 2004 में वर्कशॉप खोली। इस दौरान उन्होंने डिजाइन पर निरंतर कार्य किया और अपना विचार सुधारा। संशोधित स्वतः बढ़ने वाली मशीन में पहली वाली 2 एचपी के बजाय 18 एचपी इंजन प्राइम मूवर और एक बीच में रखी बुवाई विंड्रॉइंग मशीन थी। व्यक्तिगत घटकों और असेंबलियों को विकसित करने, जाँचने और संशोधित करने में उन्हें एक वर्ष से अधिक का समय और 10 लाख रुपए लगे। इसके अनुप्रयोगों पर विचार करते हुए, राष्ट्रीय नवप्रर्वतन ने राष्ट्रीय नवप्रर्वतन-सी.एस.आई.आर अनुबंध के तहत सी.एस.आई.आर-सी.एमई. आर.आई दुर्गापुर स्थित ट्रैक्टर के लिए इसका संलग्न के रूप में विकास करके इसके मूल्यसंवर्धन में सहायता की। इस सहायता के साथ, भगवान सिंह रीपर विंड्रॉअर का एक संलग्न के रूप में विकास करने में सक्षम रहे हैं जिसे किसी ट्रैक्टर के अग्रणी भाग में चढ़ाया जा सकता है जो अधिक शक्ति वाला लगता है।

ट्रैक्टर से चलने वाली रीपर :

विंड्रॉअरय ट्रैक्टर के लिए एक फ्रंट माउंट वाला संलग्न है। इसमें तीन विभिन्न इकाइयाँ हैं जिनके नाम हैं। खड़ी फसल को कटर बार की ओर धकेलने के लिए रील यूनिट, कटिंग यूनिट जिसमें कटर बार होता है और मशीन के बीच में फसल जमाने के लिए संग्रहण इकाई। इस प्रकार संभालना और थ्रेसिंग फ्लोर तक ले जाना आसान होता है।

यह कटाई प्रक्रिया में सम्मिलित मानव श्रम आवश्यकता और निरसता को कम करता है। विंड्रॉअर इकाई में डिजाइन अनाजों के चूर-चूर होने वाली हानि या टूटन की समस्या को अनुवर्ती बारी में दूर करती है क्योंकि टायर कटी हुई फसल पर नहीं दौड़ते हैं। यूनिट को चलाने के लिए मशीन को केवल एक व्यक्ति की और उत्पाद को एकत्रित करने के लिए पिछले भाग पर दो व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। सोयाबीन के अलावा, इसे गेहूँ, धान और दालों की कटाई के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह छोटे खेतों में कार्य करने में, तीक्ष्ण मोड़ लेने में और खड़ी फसलों को नष्ट करने में सक्षम है। पारंपरिक रीपर इकाइयों में, कटी हुई फसल प्राइम मूवर की चाल पर लंबवत् गिरती है जिससे अधिक अनाज की हानि होती है। नवप्रवर्तन की अद्वितीयता विंड्रॉइंग संलग्न की डिजाइन और आकाशीय व्यवस्था में समाहित होती है जो न्यूनतम अनाज हानि प्राप्त करती है।

संग्रहित फसल टायरों के बीच पंक्ति में संग्रहण के लिए गिरती है और अगली समांतर चाल को सहजती है। सोयाबीन फसल में सीआई.. भोपाल में परीक्षणों के अनुसार, मशीन ने 0.35 हेक्टेयर प्रति घंटा की क्षेत्र क्षमता का प्रदर्शन किया। कुल कटाई हानियाँ 3.37 होना बताया गया, जिसमें 2.33 कटाई पूर्व हानियाँ सम्मिलित हैं (अर्थात जब इस मशीन के साथ कटाई की गई, हानियाँ 1.04 थीं) और बिना काटी हानि शून्य थी। इस नवप्रर्वतन को स्टार्ट टीवी, योजना और दि हिंदू सहित कई राष्ट्रीय मीडिया पर दिखाया गया और स्थानीय मीडिया कवरेज भी प्राप्त हुई। इसका परिणाम विभिन्न जिलों से 150 से अधिक पूछताछ के रूप में हुआ। 2011 में राष्ट्रीय नवप्रर्वतन द्वारा नवप्रवर्तक के नाम परं एक पैटेंट फाइल किया गया। भविष्य के स्वप्न उन्होंने कहा कि वह उस दिन का स्वप्न देख रहे हैं जब उनकी रीपर यूनिट का उपयोग देश में छोटे किसानों द्वारा किया जाएगा।

जब वह इस पर कार्य कर रहे थे तब इसमें शामिल पैसे के कारण उनके परिवार को डर था। किंतु उन्होंने उन्हें कभी भी हतोत्साहित नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे स्वीकार करते हैं कि उनकी पत्नी राधा उनकी सच्ची सहायक थीं। उसने उन पर कभी भी संदेह नहीं किया। वह केवल कक्षा 8 तक पढ़ी है और वह जो कर रहे थे उसके बारे में उनकी पत्नी को कुछ जानकारी नहीं थी। किंतु उसने उन्हें कभी भी नहीं कहा कि वह इस नवप्रवर्तन के साथ अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं। उनके सभी बच्चे स्नातक हैं। अब, वह अपने नवप्रवर्तन के आधार पर एक एंटरप्राइज बनाना चाहते हैं जिसे उनके बच्चे आगे बढ़ा सकें। वह कहते हैं कि क्षेत्र में किसानों ने इस उपकरण को उपयोग में देखा है और उनसे इस बारे में पूछ रहे हैं। हालाँकि, पैसा लगाना एक समस्या है क्योंकि उनके पास इसके लिए नगद में भुगतान करने के लिए धन नहीं है और बैंक ऋण इत्यादि का कोई विकल्प नहीं है। वह अनुभव करते हैं कि बेहतर वृद्धि के लिए खेती कार्यों को बदलने की आवश्यकता है।आज खेती करने का ढंग अच्छा नहीं है, हमें तरक्की करने के लिए खेती करने का तरीका बदलना पड़ेगा। वह नए खेतीहर उपकरणों, कृषि कार्यों और बीज किस्मों को विकसित करने का तरीका बदलने में योगदान करना चाहते हैं।
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