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Thursday, 23 March 2017

पैराशूट धान

बैकांक, थाइलैंड के किसान जो छोटे-छोटे खेतों में धान की खेती करते हैं । यहां पर धान को रोपने की एक नई तकनीक विकसित हुई है जो कारगर होने के साथ-साथ रोचक भी है । इस तकनीक से बोये गये धान को पैराशूट धान कहते हैं। बैकांक के निकट फूरूइया, रूहयान, माई, पर्यटन स्थल पर काम करने वाली जिच्चानोक और उनकी माँ उबोल ने इस तकनीक से धान उगाने में महारथ हासिल कर ली है । इस तकनीक से धान उगाने के लिए धान की पौध को प्लास्टिक की ट्रे में तैयार करते हैं । लगभग 15 दिन के बाद पौध 15 सेंटीमीटर लम्बी हो जाती है और यही सही समय है पैराशूट तकनीक से धान की रोपाई करने का । 


इस तकनीक की खासियत है कि धान की रोपाई में एक व्यक्ति अकेला अपने खेत को संभाल सकता है और ज्यादा व्यक्तियों की आवश्यकता नहीं पड़ती । इस तकनीक से धान की अधिक उपज होती है । यह तकनीक पूर्णतयाः मानव श्रम आधारित है और किसी प्रकार के मशीन यंत्र या टूल की आवश्यकता नहीं होती । श्रीमति उबोल और जिच्चानोक ने बताया कि खेत को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद धान की पौध वाली ट्रे में से एक पौध का गुच्छा निकाल कर हवा में उस ओर उछाला जाता है जहां धान की रोपाई करनी है । धान की पौध हवा में लहराती हुई पैराशूट की तरह से खेत की नरम मिट्टी में बड़े ही कलात्मक तरह से लैण्ड करती है और धीरे-धीरे पौध अपनी जड़ पकड़ लेती है । 


श्रीमति उबोल का कहना है कि पुराने तरीके से धान लगाने में लगभग 15 से 20 किलो बीज की आवश्यकता होती थी और इस नई तकनीक से लगभग 4 किलो बीज से ही काम चल जाता है । हम लोग 4 किस्म का धान अपने खेतों में लगा सकते है जिनके नाम हैं ।

1. राइसबैरी (गहरे जामुनी रंग का धान)

2. खाओ होमनिम ;काले रंग का धान)

3. खाओकॉम ;काले रंग का चिपचिपा धान)

4. जैसमिन धान

कुल मिलाकर सारी उपज लगभग 5 टन हो जाती है और इसमें से आधी उपज रिजार्ट और पर्यटन स्थल ढ़ाबे वाले खरीद लेते हैं और लगभग आधी उपज उनके यहां आने वाले पर्यटक खरीद कर ले जाते हैं जिसे वे 100 भाट/किलो की दर से बेच देती हैं और प्रति वर्ष लगभग 2 लाख भाट कमाती हैं । 

(थाईलैंड की स्थानीय मुद्रा को भाट कहते हैं)
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